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WORLD TOILET DAY 2020: जानें क्यों जरुरी है यह दिन और क्या है शौचालय का महत्व

हर साल 19 नवंबर को ‘वर्ल्ड टॉयलेट डे’ मनाया जाता है। टॉयलेट या शौचालय को मूलभूत जरूरत समझते हुए इस दिन की शुरुआत की गयी। विश्व शौचालय संगठन ने इसकी शुरुआत 2001 में की थी। इसबार का थीम ‘सस्टेनेबल सैनिटेशन एंड क्लाइमेट चेंज’ रखा गया है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक 4.2 अरब आबादी ऐसी है जिनके लिए आज भी शौचालय उपलब्ध नहीं है। वहीं पूरे विश्व में 67.3 करोड़ आबादी खुले में शौच करने को मजबूर है। गौरतलब है कि विश्व शौचालय संगठन द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी, यह एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस दिन को 2012 में मान्यता प्राप्त हुई।

क्यों जरुरी है शौचालय?

बच्चे:

संयुक्त राष्ट्र की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 297000 बच्चें और हर दिन 800 से अधिक बच्चें ऐसे हैं जो अस्वच्छता या अनहाइजीनिक पानी पीने के कारण डायरिया से मर जाते हैं।

लड़कियों की शिक्षा प्रभावित:
डब्लूएचओ और यूनिसेफ की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के लगभग आधे स्कूलों में छात्रों के लिए साबुन और पानी की सुविधा उपलब्ध ही नहीं है। स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय स्कूल में अधिक लड़कियों की उपस्थिति को बढ़ाने में मदद करते हैं। साफ-सुथरे और सुरक्षित टॉयलेट की कमी के कारण बहुत सारी लड़कियां स्कूल बीच में छोड़ देती हैं।

स्वच्छता की कमी:
डब्ल्यूएचओ / यूनिसेफ के अनुसार वैश्विक आबादी के आधे या 4.2 बिलियन से अधिक लोगों को स्वच्छता की कमी है। विश्व स्तर पर, कम से कम 2 बिलियन लोग मल से दूषित पानी वाले स्रोतों का उपयोग करते हैं, जिसकी वजह से कई मौतें होती हैं।

इन्वेस्टमेंट/ निवेश:
वर्ल्ड टॉयलेट आर्गेनाईजेशन के अनुसार, मूल स्वच्छता में निवेश किए गए प्रत्येक 1 डॉलर के लिए, 2.5 डॉलर का रिटर्न मिलता है। वहीं पर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वच्छता के मामले में, प्रत्येक 1 डॉलर पर औसत 5 डॉलर का रिटर्न मिलता है, यह वह पैसा है जो चिकित्सा या मेडिकल से बचता है।

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