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How to take care in Pregnancy: प्रेगनेंसी में कैस रखें खुद का ख्याल

मां बन पाना लगभग हर स्त्री का एक सपना होता है जिससे उन्हें अपनी पूर्णता का एहसास होता है. जैसे-ही उन्हें पता चलता है कि वह अब मां बनने वाली हैं तो वे मात़ृत्व की भावना से भर जाती है.  प्रेगनेंसी के दौरान, उनके शरीर में बहुत सारे बदलाव होते हैं जिसमें उल्टी होना (morning sickness), वजन बढ़ना, स्ट्रेच मार्क्स ,चक्कर आना, अत्यधिक भावुक होना, सूजन होना आदि शामिल है. इसीलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि वे अपना और अपने होने वाले बच्चे का ध्यान अच्छी तरह से रखें जिससे कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें कोई परेशानी न हो, क्योंकि जरा-सी लापरवाही  एक बड़े नुकसान का कारण बन सकती है.

सबसे पहले किसी गायनिक की परामर्श लें . (Get early prenatal care)

Young pregnant woman at doctor’s

डॉक्टर की सलाह पर अपना Prenatal care check-up करवाएं जिसमें वे आपके ब्लड टेस्ट और यूरिन  मे gestational diabetes को चेक करेंगे फिर आपकी पहली स्क्रीनिंग की जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रेगनेंसी में कहीं कोई दिक्कत तो नहीं. डॉक्टर की राय से आयरन और कैल्शियम की गोली भी लेनी चाहिए.

आपका खानपान (डाईट) क्या हो ? (important nutrients during pregnancy)

इस दौरान बाहर का खाना ना लें,खासतौर पर जंक फूड से परहेज करें. कम से कम 3 लीटर पानी रोज़ पीएं. इस समय अपनी सेहत को बेहतर रखने के लिए हेल्दी डायट (Diet during pregnancy) ना सिर्फ आपके लिए जरूरी है, बल्कि आपके गर्भ में पल रहे शिशु के संपूर्ण विकास के लिए भी जरूरी होता है. गर्भावस्था के पूरे नौ महीने शरीर को हर तरह के पोषक तत्वों (important nutrients during pregnancy) की जरूरत होती है, ताकि आप फिट और स्वस्थ रह सकें.

ऐसा हो खानपान कि :

एक गर्भवती महिला को अपनी सेहत को बेहतर रखने के लिए पौष्टिक आहार ही लेना चाहिए जिसमें दाल, रोटी, चावल, मौसमी सब्जी के साथ ही फल, मेवे, घी, गुड़ और गुड़ से बनी चीजें ही होनी चाहिए. शरीर में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन की सही मात्रा पर पूरा ध्यान देना चाहिए जिससे कि शिशु स्वस्थ रूप से जन्म लें.

आपकी डाइट (Diet) में इन 8 पोषक तत्वों का शामिल होना बहुत जरूरी है जिसमें-

फॉलिकएसिड
आयरन
कैल्शियम
विटामिनडी
आयोडिन
डीएचए
प्रोटीन

इस समय क्या -क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ?

– गर्भावस्था के दौरान बायीं करवट से ही सोना चाहिए. इससे प्लेसेंटा में ब्लड और दूसरे पोषक तत्त्व भरपूर मात्रा में जाते हैं जोकि शिशु को फायदा पहुंचाते हैं. इस दौरान पैरों और घुटनों को मोड़कर ही रखना चाहिए और पैरों के बीच में तकिया लगाना चाहिए. जिससे कमर दर्द में आराम मिलता है. पीठ के बल सोने से पीठदर्द के साथ सांस व पाचनतंत्र की समस्याएं होने के साथ ब्लड प्रेशर कम होने का खतरा भी रहता है.

– भारी वजन ना उठाएं  जैसे कि पानी से भरी हुई बाल्टी ,सील-बट्टा ,भारी कुर्सी, बक्सा ,भारी सामान इत्यादि.

– बहुत देर तक खड़े ना रहे. अगर आपको किचन में बहुत देर तक खड़ा होना पड़ता है तो वहां कुर्सी का इस्तेमाल किया करें.

– सीढ़ियों का उपयोग कम से कम करें. अगर करना ही पड़े ताे एक बार करने की काेशिश करें.

– हाई हील्स वाली सैंडल या चप्पल ना पहनें करें.

– बाहरी खाना ना लें, खासतौर पर जंक फूड से पूरी तरह से परहेज करें.

– सिगरेट, शराब या  किसी भी अन्य नशे का प्रयोग न करें. नशा बच्चे के दिमागी विकास पर नकारात्मक असर डालता है.

– भरपूर नींद लें. गर्भावस्था के दौरान दिन में कम से कम दो घंटे जबकि रात में आठ घंटे की नींद स्वस्थ मां और शिशु के लिए बहुत ही जरूरी है. इससे गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत ठीक रहने के साथ मां को भी गर्भावस्था के दौरान कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं होती है.

-कम से कम 3 लीटर पानी राेज पीने की कोशिश करें.

नियमित रूप से अपनी जांच कराएं:

गर्भावस्था में नियमित जांच जरूरी है. इसमें हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर की जांच बहुत महत्त्वपूर्ण है. मां का हीमोग्लोबिन और ब्लड प्रेशर ठीक रहेगा तो गर्भ में पल रहा शिशु भी स्वस्थ होगा. हीमोग्लोबिन लेवल बारह से कम नहीं होना चाहिए. हाई रिस्क प्रेगनेंसी में अगर मां का एचबी कम है, ब्लड प्रेशर असंतुलित है या प्लेसेंटा नीचे की ओर है तो गर्भवती को समय-समय पर डॉक्टरी सलाह लेते रहना चाहिए.

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