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Amla Navami: आंवला नवमी पर आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं भगवान विष्णु

कार्तिक शुक्ल नवमी अक्षय या आंवला नवमी कहलाती है। इस दिन स्नान, पूजन, तर्पण तथा अन्न आदि के दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।  इस दिन भगवान विष्णु के प्रिय आंवले के पेड़ की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल नवमी से पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आत्मिक उन्नति के लिए  दान आदि करें।

कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी तिथि (23 नवंबर), जिसे अक्षय या आंवला नवमी के  नाम से भी जाना जाता  है, के लिए मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने कुष्मांडक नामक दैत्य का वध किया था और सतयुग का आरंभ इसी दिन से हुआ था।
इस दिन भगवान विष्णु के अतिप्रिय आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मास की आंवला नवमी का वही महत्व है, जो वैशाख मास की अक्षय तृतीया तिथि का होता है। कुछ लोग इस दिन मथुरा और वृंदावन की परिक्रमा भी करते हैं। पौराणिक मान्यता है कि अन्य दिनों की तुलना में अक्षय नवमी पर किया गया दान-पुण्य कई गुना अधिक लाभ दिलाता है।

अक्षय नवमी के दिन पूजन-विधान में प्रात:स्नान करके आंवले के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा की ओर उन्मुख होकर षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। ओम धात्र्यै नम: मंत्र का जाप करते हुए उसकी जड़ में दुग्ध-धारा गिराकर चारों ओर कच्चा सूत लपेटें तथा कर्पूर-वर्तिका से आरती करते हुए सात बार परिक्रमा करें। आरोग्य और मंगल कामना के लिए आंवला खाएं भी। इस दिन आंवला वृक्ष के नीचे ब्राह्मण-भोजन तथा दान देने का भी विशेष फल होता है। इस दिन तुलसी पूजा और विवाह का भी प्रावधान है। यह नवमी  मानव के कल्याण के लिए प्रकृति की महत्ता को उजागर करती है।

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