Home / धर्म / सफलता के सूत्र : जीवन में सफल होने के लिए राम भक्त हनुमान जी से सीखे ये 5 बातें

सफलता के सूत्र : जीवन में सफल होने के लिए राम भक्त हनुमान जी से सीखे ये 5 बातें

हनुमान जी को कलियुग में सबसे प्रमुख ‘देवता’ माना जाता है। रामायण के सुन्दर कांड और तुलसीदास की हनुमान चालीसा में बजरंगबली के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इसके अनुसार हनुमान जी का किरदार हर रूप में युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।हनुमान जी को कलियुग में सबसे असरदार भगवान माना गया है। हनुमान जी के बारे में तुलसीदास लिखते हैं ‘संकट कटे मिटे सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बल बीरा’। हमेशा अपने भक्तों को संकट से निवृत्त करने वाले हनुमान जी ‘स्किल्ड इंडिया’ के जमाने में युवाओं के परमप्रिय देवता होने के साथ ही उनके जीवन प्रबंधन गुरु की भी भूमिका निभाते हैं।

आज हम आपको ‘बजरंगबली’ के उन 5  गुणों के बारे में बताएंगे, जो न केवल आपको ‘उद्दात’ बनाएंगे, बल्कि आपके प्रोफ्रेशनल जीवन के लिए भी काफी प्रेरक साबित होंगे।

1-कॉम्युनिकेशन स्किल (संवाद कौशल)

सीता जी से हनुमान पहली बार रावण की ‘अशोक वाटिका’ में मिले, इस कारण सीता उन्हें नहीं पहचानती थीं। एक वानर से श्रीराम का समाचार सुन वे आशंकित भी हुईं, परन्तु हनुमान जी ने अपने ‘संवाद कौशल’ से उन्हें यह भरोसा दिला ही दिया की वे राम के ही दूत हैं। सुंदरकांड में इस प्रसंग को इस तरह व्यक्त किया गया हैः“कपि के वचन सप्रेम सुनि, उपजा मन बिस्वास । जाना मन क्रम बचन यह ,कृपासिंधु कर दास ।।”

2-विनम्रता

समुद्र लांघते वक्त देवताओं ने ‘सुरसा’ को उनकी परीक्षा लेने के लिए भेजा। सुरसा ने मार्ग अवरुद्ध करने के लिए अपने शरीर का विस्तार करना शुरू कर दिया। प्रत्युत्तर में श्री हनुमान ने भी अपने आकार को उनका दोगुना कर दिया। “जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा, तासु दून कपि रूप देखावा।” इसके बाद उन्होंने स्वयं को लघु रूप में कर लिया, जिससे सुरसा प्रसन्न और संतुष्ट हो गईं। अर्थात केवल सामर्थ्य से ही जीत नहीं मिलती है, “विनम्रता” से समस्त कार्य सुगमतापूर्वक पूर्ण किए जा सकते हैं।

 3- संयमित जीवन

हनुमान जी ने अपने जीवन में कभी भी संयम नहीं तोड़ा। कहा जाता है कि वह भगवान राम की सेवा के लिए वह आजीवन ब्रह्मचारी रहे। खान-पान में सावधानी बरतने और संयमित दिनचर्या के साथ रहने से बीमारी जल्दी पास नहीं आतीं। इसलिए सफलता के लिए जीवन में थोड़ी संयम रखना जरूरी है।

4- समस्या नहीं समाधान स्वरूप

जिस वक़्त लक्ष्मण रण भूमि में मूर्छित हो गए, उनके प्राणों की रक्षा के लिए वे पूरे पहाड़ उठा लाए, क्योंकि वे संजीवनी बूटी नहीं पहचानते थे। हनुमान जी यहां हमें सिखाते हैं कि मनुष्य को शंका स्वरूप नहीं, वरन समाधान स्वरूप होना चाहिए।

5- कार्य के प्रति समर्पण :

हनुमान जी को जो भी कार्य दिया जाता था उसके लिए वह पूरी तरह से खुद को समर्पित कर देते थे। कहते कि जब हनुमान जी सुग्रीव की सेवा में थे भगवान राम सीता की खोज वहां पहुंचे। इस सुग्रीव ने हनुमान जी को भेजा कि देखो कोई दुश्मन तो नहीं आ रहा। इसके बाद हनुमान जी ने वेष बदलकर मिलने पहुंचे। बताते हैं कि हनुमान जी भगवान राम यहां कुश्ती लड़ी और जब हार गए तब उन्हें लगा ये कोई आम इंसान नहीं हैं। इसके वह भगवान से सारा प्रसंग पूछा और फिर सुग्रीव के पास ले जाकर उनकी दोस्ती कराई।

Check Also

आज का राशिफल 7 मई 2021, Aaj Ka Rashifal 7 May 2021 ,Rashifal in Hindi 

आज का राशिफल 7 मई 2021 Aaj Ka Rashifal 7 May 2021 : आज हम ...