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सत्यजीत रे की जन्म शताब्दी पर देश-विदेश में मनेगा जश्न, डिजिटल-फिजिकल मोड में होंगे इवेंट

भारतीय सिनेमा (Indian Cinema) के महान और दिवंगत फिल्म निर्माता सत्यजित रे (Satyajit Ray) की कल यानी 2 अप्रैल को जयंती है. यह सत्यजीत रे का 100वां जन्मदिन है. सत्यजीत रे की जन्म शताब्दी के मौके पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा खास आयोजन किए गए हैं. देश-विदेश में समारोह आयोजित कर मंत्रालय भारत के दिग्गज फिल्मकार को श्रद्धांजलि देगा. विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय भी इस आयोजन में अहम भूमिका निभाएंगे.

पूरे साल देश और विदेश में सत्यजीत रे की याद में समारोह का आयोजन होगा. आईएएनएस के अनुसार, महामारी की स्थिति के मद्देनजर ये समारोह पूरे साल के दौरान हाइब्रिड मोड यानी डिजिटल और फिजिकल दोनों ही मोड में आयोजित किए जाएंगे. विदेश मंत्रालय, विदेश स्थित भारतीय मिशनों के माध्यम से सत्यजित रे फिल्म समारोहों का आयोजन करेंगे, जहां उनकी फिल्मों और उन पर बनी फिल्मों को दिखाया जाएगा. इसके अलावा 74वें कान फिल्म समारोह में सत्यजीत रे की फिल्मों पर स्पेशल प्रिव्यू पेश करने के साथ-साथ उन्हें दिखाने की योजना बनाई जा रही है.

अपनी फिल्मों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

बता दें कि सत्यजीत रे का जन्म 2 मई, 1921 को हुआ था. वह एक मशहूर फिल्म निर्माता, लेखक, चित्रकार, ग्राफिक डिजाइनर एवं संगीतकार थे. सत्यजीत रे ने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापन से की थी. अपनी पहली फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ के लिए प्रेरणा उन्होंने उस समय प्राप्त की जब वे विभूति भूषण बंद्योपाध्याय के उपन्यास के बाल संस्करण का चित्रण कर रहे थे. इस फिल्म ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.

इस फिल्म के बाद सत्यजीत रे ने चारुलता, आगंतुक और नायक जैसी अन्य बेहतरीन फिल्में बनाईं वह एक रचनात्मक लेखक भी थे, जिन्होंने प्रसिद्ध जासूस फेलूदा और वैज्ञानिक प्रोफेसर शोंकू का किरदार प्रस्तुत किया जो बंगाली साहित्य का एक लोकप्रिय हिस्सा है. भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1992 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था.

सत्यजीत रे को 32 राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया था. उन्हें 1992 में ऑस्कर का ऑनरेरी अवॉर्ड फॉर लाइफटाइम अचीवमेंट दिया गया था. यह अवॉर्ड देने खुद ऑस्कर के पदाधिकारी उनके घर पहुंचे थे, क्योंकि रे उस समय काफी बीमार थे और वह खुद अवॉर्ड लेने नही जा सके थे. ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित होने के करीब एक महीने के भीतर ही 23 अप्रैल, 1992 को दिल का दौरा पड़ने के कारण सत्यजीत रे का निधन हो गया था.

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