Home / धर्म / शंख बजाने से दूर होती है ये गंभीर बीमारियां, जानें इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

शंख बजाने से दूर होती है ये गंभीर बीमारियां, जानें इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

हम सभी जानते हैं कि हिंदू धर्म में पूजा पाठ का कितना महत्व है वहीं ये बात भी सच है कि हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य का आरंभ करने समय शंख बजाया जाता है। वहीं ये भी बता दें कि शंख का हमारे धर्म में बड़ा महत्तव होता है हालांकि शंख मुख्य रूप से एक समुद्री जीव का ढांचा होता है लेकिन अगर शास्त्रों की माने तो शंख की उत्पत्ति समुद्र से मानी जाती है और कहीं कहीं पर इसको लक्ष्मी जी का भाई भी मानते हैं। बताया जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान मिले 14 रत्नों में से छठवां रत्न शंख था।

कहा जाता है कि जहाँ शंख होता है वहां लक्ष्मी जरूर होती हैं यही वजह है कि शंख को बहुत ही पवित्र और शुभ चीज माना गया है। विष्णु पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी समुद्र की पुत्री हैं और शंख उनके भाई इसलिए जिस घर पर शंख होता है वहां पर माता लक्ष्मी का वास जरूर होता है। यही वजह है कि हिन्दू धर्म में मांगलिक कार्यो, विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों और रोजाना पूजा-पाठ में शंख बजाने का नियम है। शंख कई प्रकार के होते हैं और सभी प्रकारों की विशेषता एवं पूजन-पद्धति भिन्न-भिन्न है। इसके अलावा ये भी बता दें कि घर के पूजा घर में शंख रखने और बजाने का न सिर्फ धार्मिक महत्व है बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है हालांकि ये बात आपको नहीं पता होगी ।

तो आइए जानते हैं शंख बजाने व रखने का क्या है वैज्ञानिक महत्व

सबसे पहले तो ये बता दें कि शंख की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है। इतना ही नहीं जो व्यक्ति अगर हर रोज शंख बजातर है तो इससे उसके शरीर पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। खासतौर पर इंसान के फेफड़ों से संबंधित सभी रोग शंख बजाने से दूर हो जाते हैं।

आपको शायद यकीन न हो लेकिन हमारे आयुर्वेद में भी ये माना गया है कि शंख बजाने से दमा, कास प्लीहा, यकृत और इंफ्लूएंजा नामक रोग दूर होता है। इससे किडनी और जननांगों पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
इसके अलावा बताया जाता है कि जिन भी बच्चों को बोलने में समस्या होती है उन बच्चों की इस परेशानी को दूर करने के लिए शंख में पानी भरकर पिलाना फायदेमंद होता है।

इतना ही नहीं हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि शंखघोष से निकलने वाली ओम का नाद मानसिक रोगों को दूर करता है। इससे कुंडलिनी जागरण की शक्ति भी विकसित होती है। शंखनाद से शरीर और आस-पास के वातावरण शुद्ध होता है और सतोगुण की वृद्धि होती है।

इसके अलावा एक मुख्य बात ये भी बता दें कि शास्त्रों में बताया गया है कि रात में संध्या आरती के बाद शंख नहीं बजाना चाहिए। इससे लक्ष्मी नाराज होती है और आर्थिक नुकसान होता है।

Check Also

इस बार बुद्ध पूर्णिमा है बेहद खास, पहले चंद्र ग्रहण के साथ बनेंगे दो शुभ योग, जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व

इस बार वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि 26 मई को पड़ रही है. इसे बुद्ध ...