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लक्ष्मी

फ़िल्म लक्ष्मी में अभिनेता अक्षय कुमार कियारा आडवाणी ने बेहतरीन काम किया है। काफी समय से फ़िल्म अभिनेता अक्षय कुमार समाजिक विषयो पर बेहतरीन फिल्में कर रहे है जिससे समाज मे उनकी लोकप्रियता में काफी इजाफा हो रहा है। फ़िल्म लक्ष्मी किन्नर समुदाय को लेकर उनकी समस्याओं से सम्बंधित है।फ़िल्म के निर्देशक “राघव लॉरेंस” का कहना है कि वो ‘लक्ष्मी ‘ के ज़रिए ट्रांसजेंडर समुदाय को लेकर एक गहरा सामाजिक संदेश देना चाहते थे।नाम और लव जिहाद पर विवाद फिल्म लक्ष्मी रिलीज होने से पहले अपने नाम लक्ष्मी बॉम्ब ओर लव जिहाद के आरोपों को लेकर चर्चा में रही। फिल्म में लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर मेकर्स को लीगल नोटिस तक भेजा गया। जबकि, कुछ संगठनों की ओर से फिल्म के नाम पर आपत्ति जताने पर भी फिल्म विवादों में रही। बाद में फिल्म का नाम “लक्ष्मी बॉम्ब” से बदलकर लक्ष्मी कर दिया गया।
फ़िल्म लक्ष्मी साउथ की फ़िल्म “कांचना “की रीमेक है। फ़िल्म के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि ट्रांसजेंडर होना कोई अभिशाप नही है, यह तो प्रकति की देन है , पुरुष और महिला मनुष्य की पहचान है अगर यह दोनों मिल जाये तो इसे अर्धनारीश्वर कहते है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आदिशक्ति (शिव -पार्वती) ने भी अर्धनारीश्वर रूप धारण किया था। समाज मे ट्रांसजेंडर को लोग हेय की दृष्टि से देखना पसंद करते है लोग इन्हें प्रायः हिजड़ा, छक्का, कहकर पुकारते है। इनसे बात करना तो दूर इनसे दोस्ती करना भी लोग गलत मानते है लेकिन अगर देखा जाए तो यह भी हमारे समाज के ही लोग है इनको भी वही सम्मान मिलना चाहिए जो सबको मिलता है लेकिन समाज मे फैली कुरीतियों ने ट्रांसजेंडर को लेकर बहुत सारी कुरीतियों को जन्म दे दिया है। फिर भी सरकार ने ट्रांसजेंडर के विकास के लिए कई योजनाएं बनाई है । आजकल इनका भी संगठन है पढ़े लिखे लोग है जो अपनी सेवाएं कई क्षेत्रों में दे रहे है। मैं यह कहना चाहता हूं की जब धार्मिक मान्यताओं में शिव -पार्वती के एक ही रूप होने को (आधा पुरुष -आधी स्त्री) होने को अर्धनारीश्वर नाम दिया जा सकता हैं तो फिर ही एक ही शरीर वाले एक (परुष और स्त्री )को हिजड़ा , छक्का कहकर समाजिक बहिष्कार क्यों किया है। इन्हें भी अर्धनारीश्वर नाम दिया जाएं।
फ़िल्म लक्ष्मी एक समाजिक विषय पर आधारित फिल्म है, फ़िल्म के नायक अक्षय कुमार ने इससे पहले महिलाओं की माहवारी से सबंधित फ़िल्म पैडमैन, टॉयलेट एक प्रेम कथा जैसी समाजिक विषयो की फिल्मों की है जिन्होंने दर्शको के बीच अपनी बेहतरीन छाप छोड़ी है।
फ़िल्म लक्ष्मी ने किन्नर समुदाय की समस्याओं के साथ हिन्दू -मुस्लिम का भेदभाव छोड़ इंसानियत पर जोर कसने पर बल दिया है। फ़िल्म और सामाजिक रूप से देखा जाए तो किन्नर होना अभिशाप नही है यह प्रकति की देना बस जरूरत है जिंदगी सही ढंग से जी जाए।

योगेंद्र गौतम
उन्नाव

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