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लक्षण के बाद कोविड रिपोर्ट निगेटिव आने पर क्‍या निमोनिया की जांच करानी चाहिए? जानें जरूरी जानकारी

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में कई ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद लोग आश्‍वस्‍त हो जा रहे हैं कि वो कोविड-19 की जद में नहीं है. लेकिन, कुछ मामलो में संक्रमण की वजह से उन्‍हें निमोनिया होने की शिकायत आ रही और स्थिति खराब हो जा रही है. ऐसे में जरूरी है कि टेस्‍ट रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी खुद का ख्‍याल रखें और मामूली लक्षण को लेकर सतर्क रहें. हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ये निमोनिया क्‍या है, इसके लक्षण क्‍या होते हैं और इसके लिए आपको क्‍या करना चाहिए?

क्‍या है निमोनिया?

हमारे फेफड़ों में समस्‍या की वजह से निमोनिया होती है. किसी भी व्‍यक्ति में सामान्‍य तौर पर या कोरोना के कारण भी निमोनिया हो सकता है. दोनों कारणों से होने वाले निमोनिया के लक्षण में कोई अंतर नहीं होता है. हालांकि, यह जानना जरूरी है कि सामान्‍य स्थिति में निमोनिया के मरीज की हालत इतनी जल्‍दी खराब नहीं होती है और न ही उनकी बॉडी में ऑक्‍सीजन की स्थिति कम होती है.

फेफड़ो में करोड़ों की संख्‍या में हवा भरने वाले छोटे-छोटे थैले होते हैं. इन थैलों को एल्‍वीलाई (Alveoli) कहते हैं. जब इन्‍हीं थैलों में हवा की जगह म्‍युकस (बलगम) या इनसे जुड़ी खून की महीन नलिकाओं में खून जमा हो जाता है तो इसे ही निमोनिया कहते हैं. ऐसी स्थिति में फेफड़ों में हवा की कमी हो जाती है और मरीज के शरीर में ऑक्‍सीजन की मात्रा पर्याप्‍त नहीं रहती.

इस स्थिति से बचने के लिए इंफेक्‍शन के लक्षण दिखते ही दवा लेनी चाहिए और फेफड़ों के लिए एक्‍सरसाइज करना चाहिए. लेकिन सवाल अब भी है, कैसे पता चलेगा कि किसी व्‍यक्ति को निमोनिया है?

क्‍या हैं निमोनिया के लक्षण?

  • व्‍यक्ति में लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी हो सकती है. आमतौर पर शुरुआती 5 दिनों में यह खांसी सूखी होती है और इसके बाद बलगम वाली होती है.
  • अगर खांसी की वजह से लगातार सांस फूलने लगे तो व्‍यक्ति को सावधान हो जाना चाहिए.
  • निमोनिया की स्थिति में ऑक्‍सीमीटर पर रीडिंग कम हो सकती है. इससे पता चलेगा कि बॉडी में ऑक्‍सीजन की मात्रा कितनी कम है.
  • गंभीर निमोनिया की स्थिति में व्‍यक्ति बुखार हो सकता है और खांसते हुए उल्‍टी भी हो सकती है.

निमोनिया के लक्षण की स्थिति में एक्‍सरे कराएं या सीटी स्‍कैन?

अगर किसी व्‍यक्ति का RT-PCR रिपोर्ट निगेटिव आता है और उनमें सांस फूलने और सीने में दर्द की शिकायत है तो इसमें निमोनिया के लक्षण है. ऐसे में डॉक्‍टर्स एक्‍सरे या सीटी स्‍कैन की सलाह देते हैं. यह भी ध्‍यान देने योग्‍य है कि डॉक्‍टर्स एक्‍सरे की सलाह तभी देते हैं, जब मरीज में निमोनिया के गंभीर लक्षण न हो.

अगर किसी मरीज में गंभीर लक्षण होते हैं तो डॉक्‍टर्स ऐसी स्थिति में डॉक्‍टर्स सीधे छाती के सीटी स्‍कैन कराने की सलाह देते हैं. अगर दोनों की तुलना करते हैं तो इनमें सीटी स्‍कैन ज्‍यादा करगार है.

बता दें कि दोनों में एक्‍सरे तकनीक का ही इस्‍तेमाल किया जाता है. सीटी स्‍कैन में बहुत ज्‍यादा रिजॉलुशन होता है, इसलिए इसे खतरनाक भी माना जाता है.

एक्‍सरे और सीटी स्‍कैन में कितना खर्च और समय लगता है?

सामान्‍य तौर पर एक्‍सरे के लिए 15 मिनट का समय लगता है. इसपर खर्च करीब 200 से 400 रुपये ही लगता है. एक्‍सरे की तुलना में सीटी स्‍कैन अधिक समय और खर्चीला भी होता है. सीटी स्‍कैन के लिए 2 से 3 घंटे का समय लगता है. खर्च की बात करें तो एक सीटी स्‍कैन में 4,000 रुपये से लेकर 8,000 रुपये लगता है.

किसे कराना चाहिए HRCT?

RT-PCR रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी अगर निमोनिया के लक्षण मौजूदहों या ऑक्‍सीन लेवल बार-बार 90 से नीचे जा रहा होगा या मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही है डॉक्‍टर्स सीटी स्‍कैन करा सकते हैं. फेफड़ों में इन्‍फेक्‍शन की सटीक स्थिति के बारे में जानने में सीटी स्‍कैन कराया जाता है.

HRCT टेस्‍ट रीडिंग कोविड-19 रिपोर्टिंग एंड डेटा-सिस्‍टम्‍स (CO-RADS) स्‍कोर और सीटी स्‍कोर के आधार पर की जा सकती है. आपके लिए यह भी समझना जरूरी है यह सीटी स्‍कोर और RT-PCR की सीटी वैल्‍यू में कोई मेल नहीं है.

ये दोनों एक दूसरे से बिल्कुल अगल हैं. HRCT के स्‍कोर से फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है, जबकि RT-PCR की सीटी वैल्‍यू से व्‍यक्ति में वायरल लोड के बारे में जानकारी देता है.

CO-RADS स्‍कोर का क्‍या मतलब है?

CO-RADS स्‍कोर 1 से 6 अंकों के बीच होती है. आपको यह जान्‍ना जरूरी हे कि यह स्‍कोर जितना कम होगा, मरीज के फेफड़ों की स्थिति उतनी ही अच्‍छी होगी. अगर यह स्‍कोर 1 है तो इसका मतलब है की मरीज की स्थिति सामान्‍य है. 2 से 4 के बीच स्‍कोरिंग का मतलब है कि मरीज को वायरल इन्‍फेक्‍शन है.

यह स्‍कोर 5 होने का मतलब है कि मरीज में कोरोना के हल्‍का लक्षण है. अगर किसी मरीज में CO-RADS स्‍कोर 6 है तो इसका मतलब है कि उनके फेफड़े में ज्‍यादा इन्‍फेक्‍शन है और खतरा भी ज्‍यादा है.

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