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यश चोपड़ा निर्मित फिल्म ‘जब तक है जान’ को पूरे हुए 13 साल

यश चोपड़ा की टाइमलेस रोमांटिक फिल्म ‘जब तक है जान’ के लिए कंपोज की गई ए.आर. रहमान की मनमोहक धुनों ने हर भारतीय के दिल को छू लिया था। शाहरुख खान, कैटरीना कैफ और अक्षय कुमार स्टारर यह फिल्म यश चोपड़ा की आखिरी फिल्म थी और इसी के साथ भारतीय सिनेइतिहास के एक महान फिल्मकार बनने का गवाह रहे उनके करियर का परदा भी गिर गया था। वाईआरएफ की ‘जब तक है जान’ लीजेंडरी फिल्म-मेकर यश चोपड़ा और ऑस्कर-विजेता ए.आर. रहमान के पहले रचनात्मक गठजोड़ की निशानी बन गई।

आयकॉनिक फिल्मकार यश चोपड़ा के साथ करने का अपना प्यारा अनुभव याद करते हुए रहमान कहते हैं, “मुझे लगता है कि इतनी दिग्गज हस्ती के साथ काम करना अपने आपमें एक बहुत बड़ा सम्मान था। उनका (यश चोपड़ा का) हर दिलकश चीज को लेकर बच्चों जैसा उत्साह हुआ करता था। यह जानते हुए कि वाईआरएफ स्टूडियोज और फिल्में उनके ही विजनरी दिमाग की उपज थीं, यह देखना बेहद दिलचस्प था कि वहां सब कुछ कितना सुव्यवस्थित है। यह एक सुखद अहसास भी था। आपको पता ही है कि इतने अनुभवी व्यक्ति से आप कुछ खास चीजों की उम्मीदें करते ही हैं, लेकिन इसके आगे बढ़कर वह हमेशा सबसे इनोवेटिव आइडिया चुनते थे। एकदम नई-नई चीजें उठाने के बावजूद उनको परंपरा में ढाल देने की उनमें जबर्दस्त खासियत मौजूद थी।“

‘जब तक है जान’ की 8वीं सालगिरह पर रहमान बता रहे हैं कि यश जी के साथ उनकी रचनात्मक सहभागिता कैसी थी। उनका कहना है- “मैं समझता हूं कि यशराज फिल्म्स की हर मूवी कुछ खास चीजों को फॉलो करती है। मैं बस यह देखना चाहता था कि इसमें मेरा क्या योगदान हो सकता है। मैं इस फिल्म के ज़ोन में गहरे उतर गया और यकीनन एक दिलचस्प फिल्म तैयार हुई थी। चूंकि फिल्म का सब्जेक्ट मेरा फेवरिट था इसलिए मैं फ्लो के साथ बहता चला गया।“
रहमान आगे बताते हैं, “मुंबई में म्यूजिक तैयार करने की प्रक्रिया, मेरे स्टूडियो और उनके स्टूडियो के बीच जारी रही… हम एक जगह से दूसरी जगह लगातार आते-जाते रहे। मुझे पता था कि वह (यश चोपड़ा) दूसरों के स्टूडियो में कभी नहीं जाते थे, लेकिन दयालुतापूर्वक वह मेरे यहां पधारे और गुलजार साहब के साथ ठहरे रहे, बस हम तीनों ही थे। संगीत तैयार करने का प्रोसेस बेहद यादगार था।“

गुलजार साहब और ‘जब तक है जान’ को लेकर अपने विजन के बारे में रहमान बताते हैं- “आपको पता है, जनाब गुलजार साहब के साथ आप जब भी काम करें… वह खुद एक किस्म की पोएट्री रचते जाते हैं। उनके हाव-भाव… जिस तरह से वह बात करते हैं… उनकी आंखें मोहब्बत और अक्लमंदी से लबरेज होती हैं। तो, उन दोनों के साथ काम करना बेहद दिलचस्प रहा। कई बार हम तीनों काम करने के बाद एक साथ रोजा खोलते थे, इस तरीके से यह बड़ा जबर्दस्त अनुभव था।“

रहमान के दिल में अपने रचे हर गाने/एल्बम की एक खास जगह है। उनका कहना है, “मेरी नजर में ‘हीर हीर’ सॉन्ग मेरे लिए बेहद खास था, क्योंकि इसको तैयार करने के लिए उन्होंने मुझे काफी आजादी दे रखी थी। उन्होंने मुझे बस इस गीत के बोल थमा दिए थे और कहा था कि ‘यह भर्ती वाला गाना है। हमें इसके केवल 30 सेकेंड चाहिए।‘ और जब हमने इसे रिकॉर्ड कर लिया तो यश जी ने मुझसे पूछा- ‘आप तो पंजाबी नहीं हैं। तब आपने पंजाब की सारी बारीकियां कैसे पकड़ लीं?’ मेरा जवाब था- ‘संगीत को इसकी जरूरत नहीं पड़ती…कोई पंजाबी गाना कंपोज करने के लिए आपका पंजाब में रहना जरूरी नहीं है। क्योंकि भारत में हम सब एक-दूसरे से गुंथे हुए हैं। हमारी परंपराएं एक-दूसरे के साथ गहराई तक जुड़ी हुई हैं, हम एक-दूसरे के कल्चर की कदर करते हैं”।‘ तो, इस सबका आपके ऊपर असर पड़ता ही है। इसका अपना एक खास अहसास भी होता है, लेकिन अभी तक इसकी कोई ठोस शक्ल नहीं उभर पाई है।“

हिट रोमांस ‘जब तक है जान’ में शाहरुख खान और कैटरीना कैफ के बीच गजब की केमिस्ट्री थी और कोरियोग्राफर वैभवी मर्चेंट ने ‘इश्क शावा’ गाने के अंदर उनके ऑन-स्क्रीन रोमांस में अपना तड़का लगा दिया था। यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित आखिरी फिल्म ‘जब तक है जान’ की 8वीं सालगिरह पर वैभवी बता रही हैं कि कैटरीना और एसआरके ने लीजेंडरी डाइरेक्टर की इस बेहद खास और आखिरी फिल्म में किस तरह अपनी पूरी जान लगा दी थी।

वैभवी बताती हैं, “मेरी नजर में तो कैटरीना और एसआरके दोनों ने इस गाने पर खास तौर से बड़ी मेहनत की थी, क्योंकि यह बहुत-बहुत ज्यादा स्पेशल फिल्म थी। उन्हें पता था कि यह यश अंकल की आखिरी फिल्म है क्योंकि इस फिल्म के बाद उन्होंने अपने रिटायर होने का ऐलान करने का मन बना लिया था। तो हम सभी अपनी जान लड़ा देना चाहते थे और कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहते थे। इस फिल्म को हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना चाहते थे।“

वह खुलासा करती हैं कि इस गाने के लिए लीड पेयर ने कितनी कड़ी मेहनत की थी। “कैटरीना को इस गाने के लिए मुंबई में काफी पहले से ट्रेनिंग दी गई थी लेकिन ट्रेनिंग के लिए एसआरके कभी हमारे हाथ नहीं लगे। कई बार मुझे आश्चर्य होता है कि ऐसी क्या वजह है जो वह ट्रेनिंग नहीं कर सकते! तो, एसआरके को ट्रेनिंग देने का हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प ही नहीं था कि हम लंदन में ही उनके साथ रिहर्सल करें। मेरा अंदाजा है कि उन्होंने शायद करीब 3 या 4 सेशन की रिहर्सल की होगी लेकिन ये 3-4 सेशन ही भयंकर थे! गाने के स्टेप्स को उनके सही ढंग से पकड़ लेने से पहले हम न तो पीछे हट सकते थे और न ही आगे बढ़ सकते थे। शाहरुख समझते थे कि गाने में उनका पूरी तरह से डूब जाना जरूरी है क्योंकि उन्हें पता था कि यश जी और आदि उनको काम सही होने से पहले दम नहीं लेने देंगे, और वह उस हड्डियां जमा देने वाली ठंड में सेट पर इसे बार-बार दोहराना नहीं चाहते थे”- याद करती हैं वैभवी।

वैभवी आगे बताती हैं, “कैटरीना इतनी ज्यादा रिहर्सल करने वाली एक्ट्रेस हैं कि उनको रिहर्सल करने से रोकना पड़ता है। वह एसआरके से एकदम उलट हैं। वह तब तक रिहर्सल करते रहना चाहती हैं, जब तक कि सारी चीजें सही ढंग से उनकी समझ और पकड़ में न आ जाएं। वे शुरू से ही ऐसी रही हैं। दूसरे सभी गानों या किसी भी डांस नंबर के लिए वह हमेशा काफी कड़ी मेहनत करती हैं। एक बेहतरीन डांसर होने के बावजूद वह खुद को अच्छी डांसर नहीं मानतीं।“

वैभवी राज खोलते हुए कहती हैं कि माइकल जैक्सन, मैडोना और बियांस के साथ परफॉर्म करने वाले डांसरों को ‘इश्कशावा’ के लिए बुलाया गया था! “हमने वाकई दुनिया के कुछ बेस्ट डांसर हायर किए थे। लंदन के ब्रॉडवे में परफॉर्म कर चुके लोग, वेस्टइंड की टीम में शामिल डांसर तथा माइकल जैक्सन, मैडोना और बियांस जैसी हस्तियों के साथ परफॉर्म करने वाले कलाकार हमारे इस गाने का हिस्सा थे। वह नृत्य कलाकारों का ऐसा शानदार समूह था, जिसने हमारे लीड पेयर की बड़ी मदद की! वे हौसला बढ़ाते थे और जैसे ही शूटिंग खत्म होती थी, वे सभी एक-दूसरे को चीयर किया करते थे।“

‘इश्क शावा’ एक अनोखी लोकेशन पर फिल्माया गया था और इसमें स्ट्रीट डांसिंग वाला अहसास भरा हुआ था, जो किसी हिंदी फिल्म के लिए एकदम ताजा और नई चीज थी। वैभवी अपना अनुभव साझा करती हैं- “अपने हिस्से की चुनौतियों का सामना किए बगैर कुछ भी हासिल नहीं होता। ‘इश्क शावा’ की शूटिंग करते वक्त खून जमा देने वाली ठंड पड़ रही थी। इससे हमको जरा भी शिकायत नहीं थी क्योंकि वहां सिनेमा के प्रति अपने प्यार और जुनून को दिल में संभाले हुए डाइरेक्टर की कुर्सी पर अपनी जैकेट पहने 80 बरस का वह आदमी बैठा होता था, जिसका अपने हुनर को लेकर एक जिद्दी रवैया था। हम सबके ऊपर एक छायादार बरगद की तरह तना हुआ वह आदमी मौजूद रहता था, जिसका अपनी फिल्मों के प्रति सम्पूर्ण समर्पण, दीवानगी और जुनून बेमिसाल रहा है।“

वैभवी अपनी बात को विस्तार देते हुए कहती हैं- “गाने की डिमांड के मुताबिक कैटरीना को खास तरह से कपड़े पहनने पड़ते थे। लेकिन शूटिंग से पहले उन्हें ठंड से बचाने वाले अपने तमाम जैकेट वगैरह उतार देने होते थे और तब उस बर्फीली ठंड में उनको डांस करना पड़ता था! हम तब भी जैकेटों से लदे होते थे। मैं इसकी कल्पना ही कर सकती हूं कि हमारे एक्टर यह सब कैसे निभा ले गए थे! एसआरके ने लंबे अरसे बाद इतने गजब का डांस किया था! मेरा मानना है कि उन्होंने शायद वर्षों बाद इस गाने में एक माकूल कोरियोग्राफी के सहारे डांस किया था।

देखिए, एसआरके को हमेशा उनके दिलकश लुक और एक्सप्रेशन तथा उनके ग्रांड जेस्चर्स के लिए जाना जाता है। इसमें वह फेमस पोज भी शामिल है, जिसे वह अपनी बाहों को फैलाते हुए दिया करते हैं। लेकिन यहां उनको काफी चीजों की रिहर्सल करनी थी, बहुत कुछ प्रोजेक्ट करना था और उनको ढेर सारे दूसरे काम भी सीखने और करने पड़े। चूंकि डांस की यूएसपी रखने वाली कैटरीना के साथ उनको डांस करना था इसलिए उनके साथ स्टेप्स मिलाना जरूरी था। मानना पड़ेगा कि कैटरीना का साथ देने के लिए एसआरके ने रिहर्सलों के दौरान वाकई जम कर पसीना बहाया था”

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