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बेटी है तो कल है।

अंतर्राष्ट्रीय डॉटर्स डे हर साल सितंबर के चौथे रविवार को मनाया जाता है।भारत मे बेटी दिवस 26 सितम्बर को मनाया जा रहा है।संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार 11 अक्टूबर 2012 को एक दिन बेटियों को समर्पित किया। संयुक्त राष्ट्र की इस पहल का स्वागत दुनिया भर के देशों ने किया। इसके बाद से ही हर देश में बेटियों के लिए एक दिन समर्पित किया गया है। डॉटर्स डे हर देश में अलग-अलग दिन मनाया जाता है।हर क्षेत्र में बेटियां अपना हुनर दिखा रही है। चाहे खेलकूद हो या शिक्षा क्षेत्र हो वह बड़ी से बड़ी नौकरी हासिल करती है। आज बेटियां चांद तक पहुंच गई है हर कार्य कर सकती है।यह लाइन तो सुनी ही होगी ना, कि बेटा भाग्य से पैदा होते हैं और बेटियां सौभाग्य से।बेटियां अपने साथ पूरे परिवार की किस्मत बदल देती है। उन्हें खुला आसमान दिया जाए तो वह ऊंची उड़ान भर सकती है। एक बेटियां ही होती है जिसके दिल में सबके लिए प्यार होता है ।चाहे वह मायका हो या ससुराल। दोनों घरों को बांध कर रखती है। बेटों से ज्यादा बेटियां अपने माता पिता और परिवार की परवाह करती है।बेटियां आज किसी भी बात पर बेटों से कम नहीं है। उनकी शिक्षा-दीक्षा अगर अच्छे से की जाए तो वह हर मुश्किल को पार कर के माता पिता का नाम रोशन कर सकती है। वैसे बेटियों को एक दिन सेलिब्रेट करना संभव नहीं है। फिर भी यह एक दिन बनाया गया है। इस दिन बेटियों को विशेष रुप से सेलिब्रेट किया जाता है।समाज पुरुष प्रधान रहा है और महिलाओं को वोट देने का मूल अधिकार 1920 में काफी संघर्ष के बाद प्राप्त हुआ था। इसलिए समाज में लड़कियों को लेकर कलंक को मिटाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जैसे दिनों को मनाना और भी जरूरी हो जाता है। समाज को यह स्वीकार करना चाहिए कि लड़कियां बुद्धिमान, सहानुभूति रखने वाली, स्वतंत्र और स्तर की होती हैं।

योगेंद्र गौतम

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