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बच्चों को सिखाएं ये 6 गुण, जिंदगी में कभी नहीं होगी उनकी पराजय

बच्चों की सफलता के लिए सिर्फ किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नही होता। आपके बच्चे रचनात्मक और व्यावहारिक बनें, इसके लिए आपको कुछ तरीके अपनाने होंगे। किताबी ज्ञान देकर भले ही आप अपने बच्चे को प्रोफेशनल बना लें, मगर व्यवहारिक ज्ञान के बिना उनकी जानकारी अधूरी है। 21वीं सदी के बच्चे हैं, जहां हर कुछ फास्ट है। ऐसे में बच्चों की क्षमताओं को इस प्रकार बनाने की आवश्यकता है, ताकि उनका हर जगह संतुलन बना रहे। अनुभव लर्निंग सेंटर की निदेशक डॉ. नीना गुलबानी कहती हैं कि आज के बच्चे स्मार्ट और तेज हैं। उनका चीजों को ग्रहण करना, उनकी तकनीकी गुणों का कोई मुकाबला नही है और यह बिल्कुल प्राकृतिक है। इसलिए माता-पिता और शिक्षक गणों को उन्हें इस तरीके से तैयार करना चाहिए कि आगे चलकर वे हर स्तर पर बेहतर साबित हों।

दूसरों की मदद के लिए प्रोत्साहन करनाः  बच्चों को हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करें. चाहे वह बूढ़े हों, निर्बल हों, बच्चे हों, गरीब हों या भूखे ये सब समाज के वे लोग हैं, जिन्हें लोगों की मदद की जरूरत होती है। इनकी मदद करने से बच्चों में लोगों के प्रति मदद की भावना पैदा होती है और इस कार्य से आप स्वयं भी जुड़ें।

सीखने की प्रवृत्तिः बच्चों को हमेशा नई-नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित करें इसके लिए उन्हें मौका दें, ताकि वे खुद से समस्याओं को सुलझा सकें और छोटी-छोटी चीजों के लिए परेशान न हों। इससे बच्चों को भविष्य में बड़ी से बड़ी समस्याएं सुलझाने में कठिनाई नही होगी।

जवाबदेही होनाः बच्चों को इस बात के लिए समर्थन करें कि उन्होंने जो बोला है, जो लिखा है, जो काम किया है, उसके प्रति वह जवाबदेह रहें और ऐसा करने के लिए उन्हें प्रेरित करें कि वह खुश रहें और माता-पिता तथा अध्यापकों से प्रशंसा प्राप्त करें।

मार्गदर्शक की भूमिकाः बच्चों को मौका दें कि वह दूसरों की मदद कर सकें और दूसरों का मार्गदर्शन भी कर सकें। इससे कोई फर्क नही पड़ता कि वह छोटा सी कोशिश है या बड़ी इससे बच्चे एक लीडर की तरह लोगों का मार्गदर्शन करना सीखेंगे। हम अक्सर यह सोचकर बच्चों को घर से बाहर नही निकलने देते कि उसकी पढ़ाई का नुकसान होगा लेकिन आप अपनी इस धारणा को समाप्त कर दें। उन्हें संसार से जुड़ने का मौका दें। अपने आसपास के लोगों से वह संपर्क स्थापित करें, इसके लिए उन्हें उत्साहित करें।

बच्चों में दूसरों की संस्कृति, धर्म के प्रति आदर भाव रखने के गुण विकसित करें। इससे बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं। अगर आप ऐसा करेंगी, तो निश्चित ही बच्चे 21वीं सदी में एक लीडरशिप की तरह व्यवहार करेंगे।

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