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देश के 112 जिलों को पोषणयुक्त चावल की आपूर्ति करने पर विशेष ध्यान

नई दिल्ली  :  देश में पोषण सुरक्षा को व्यावहारिक रूप देने की प्रक्रिया के तहत खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने ‘चावल को पोषणयुक्त बनाने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए इसके वितरण के वास्ते एक केन्द्र प्रायोजित पायलट परियोजना’ लागू की है। यह पायलटयोजना 2019-20 से शुरू हो रहे तीन सालों के लिए मंजूर की गई है और इसके लिए 174.6 करोड़ रुपये का कुल बजट आवंटन किया गया है। इस पायलट योजना को लागू करने के लिए 15 राज्य सरकारों ने अपने-अपने जिलों की (प्रति राज्य एक जिला) पहचान की है। आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़- इन पांच राज्यों ने पहले ही अपने-अपने जिलों में इस पोषणयुक्त चावल का वितरण शुरू कर दिया है।

केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों, रेलवे, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 31.10.2020 को हुई एक समीक्षा बैठक में देश में इस पोषणयुक्त चावल के वितरण को बढ़ाने पर जोर दिया। एक अन्य बैठक, 02.11.2020 को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई जिस में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से देश के सभी जिलों से इस पोषणयुक्त चावल की खरीद और उसके वितरण के संबंध में एक समन्वित योजना बनाने के लिए कहा गया। एफसीआई यह योजना 2021-22 के लिए समन्वित बाल विकास सेवाओं (आईसीडीएस) और मिड-डे-मील (एमडीएम) योजनाओं के तहत तैयार करेगा। इसका विशेष ध्यान देश के 112 विशेष रूप से पहचान किए गए महत्वकांक्षी जिलों में पोषणयुक्त चावल के वितरण पर रहेगा।

नीति आयोग के सीईओ ने आजखाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव, एफएसएसएआई के सीईओ तथा अन्य भागीदारों जैसे टाटा ट्रस्ट, वर्ल्ड फूड प्रोग्राम, पाथ, न्यूट्रिशन इंटरनेशनल आदि से चावल कोपोषणयुक्त बनाने की योजना की प्रगति और उसमें वृद्धि की संभावनाओं पर चर्चा की। देश के महत्वकांक्षी जिलों में समन्वित बाल विकास योजना/मिड-डे-मील योजना के संबंध में ‘चावल कोपोषणयुक्त बनाने और उसके वितरण’ की योजना को बढ़ावा देने के लिए आपूर्ति चेन और अन्य लॉजिस्टिक जरूरतों के बारे में भी इस बैठक में चर्चा हुई।

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