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दुनिया में तीसरे नंबर पर भारत प्रदूषित नल के पानी में

ऐसे समय जब हम पूरे देश में अनिश्चित मानसून और ताजे पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं, ये आंकड़े अच्छे भविष्य की ओर इशारा नहीं करते.

शोध करने वाले इंस्टीट्यूट में डॉ. ऐने मैरी माहन ने कहा, नल के पानी के सैंपल में नैनोपार्टिकल्स मौजूद थे, जो मापे नहीं जा सकते थे और ऐसे नैनोपार्टिकल्स, ह्यूमन आर्गन में कोशिकाओं के जरिए घुस भी सकते थे.

क्या फिल्टर मदद कर सकता है?

माइक्रोप्लास्टिक के स्रोत

सिन्थेटिक कपड़े, पेंट, टायर की गंदगी

द्वितीयक माइक्रोप्लास्टिक्स

बैग, स्ट्रॉ, फॉर्क

माइक्रोबीड्स

टूथपेस्ट, कॉस्मैटिक प्रोडक्ट्स

माइक्रोप्लास्टिक को फैलने से कैसे रोकें?

– प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल न करें

– प्लास्टिक वॉटर बॉटल को खरीदने से बचें, दोबारा उपयोग होने वाली चीजों का इस्तेमाल करें.

– प्लास्टिक की जगह कांच खरीदें.

– पहिये की गंदगी को कम करने के लिए सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें.

– अपने सिंथेटिक कपड़ों को बार-बार न धोएं.

महर्षि के मुताबिक, वह अभी तक किसी भी ऐसे वॉटर प्यूरीफायर के बारे में नहीं जानते जो माइक्रोप्लास्टिक्स को फिल्टर करने का दावा करता है.

माइक्रोप्लास्टिक्स, प्लास्टिक फाइबर के छोटे टुकड़े हैं, जो आमतौर पर 5 MM लंबे होते हैं. ये बायोडिग्रेडेबल नहीं होते. लेकिन ये अपने आप छोटे-टुकड़ों में टूटते हैं

तुरंत समाधान

आप किसी भी रूप में प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचें. हालांकि,स्टडी ने माइक्रोप्लास्टिक्स के कारण होने वाली विशिष्ट स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में नहीं बताया है, ऐसे में बचाव ही एक रास्ता हो सकता है.

प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने से ही हम माइक्रोप्लास्टिक को फैलने से रोक सकते हैं. प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट का बड़े स्तर पर नियमित करने की जरूरत है.

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