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दांत में आखिर क्यों लगता है ठंडा पानी? वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया जवाब, जानें इसके पीछे का कारण

दुनियाभर में लोगों को टूटे हुए या सेंसेटिव दांतों (Sensitive Tooth) से आइसक्रीम खाने और ठंडा पानी पीने पर बेहद की तेज दर्द झेलना पड़ता है. लेकिन वैज्ञानिकों को अभी तक इस अनसुलझी पहेली का जवाब नहीं मिल पाया था कि दर्द का ये सिग्नल किस तरह दिमाग तक पहुंच जाता है. हालांकि, अब जाकर वैज्ञानिकों ने इसका जवाब ढूंढ़ लिया है और इसके लिए TRPC5 नामक एक प्रोटीन को जिम्मेदार माना है.

वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन को दांतों के भीतर मिलने वाले ओडॉन्टोब्लास्ट (Odontoblasts) सेल्स में पाया है. ये सेल्स इनेमल (Enamel) के नीचे दांतों के खोल का निर्माण करते हैं. ओडॉन्टोब्लास्ट दांतों की शेप के लिए मददगार होते हैं. अब वैज्ञानिकों ने खोज की है कि ये सेल्स कोल्ड सेंसर्स (Cold sensors) के तौर पर भी काम करते हैं. ये सेल्स ऐसा कर पाते हैं क्योंकि TRPC5 एक आयन चैनल है. जो एक गेटवे की तरह केल्शियम जैसे केमिकल को सेल मेंबरेंस के जरिए कुछ शर्तों के तहत सिग्नल भेजने की अनुमति देता है. इस मामले में ये ठंड का सिग्नल भेजता है.

च्यूइंग गम के जरिए ठीक हो सकता है दांतों का दर्द!

दांतों में दर्द या हाइपरसेंसटिविटी में मदद करने के लिए इन निष्कर्षों के आधार पर नए इलाज विकसित किए जा सकते हैं. शायद च्यूइंग गम या किसी दवा के जरिए दांतों के खोल को ढकने का तरीका ईजाद कर लिया जाए, जो लोगों को सेंसटिविटी से बचा सकेगा. इससे पहले TRPC5 की पहचान एक संभावित तापमान सेंसर के रूप में हुई थी. चूहों पर किए गए टेस्ट के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि जिनमें TRPC5 नहीं है, वो ठंड को लेकर अलग तरह की प्रतिक्रिया दे रहे थे. केमिकल के लिए जरिए अगर प्रोटिन आयन चैनल को बंद कर दिया जाता तो इसका कुछ प्रभाव देखने को मिल रहा था.

शरीर के अन्य हिस्सों में भी मौजूद होता है TRPC5 प्रोटीन

इसके बाद इंसान के दांतों पर एक बारीकी भरी निगरानी की गई. दांत को एपोक्सी रेजिन में रखा गया, इसके बाद इसे सावधानीपूर्वक काटा गया. वैज्ञानिकों ने पाया कि दांतों के ओडॉन्टोब्लास्ट सेल्स में भी TRPC5 चैनल मौजूद है. इससे ये बात पुख्ता हो गई कि दांतों में झंझनाहट के पीछे इन्हीं का हाथ है, जो दिमाग को सिग्नल भेजने का काम करते हैं. TRPC5 प्रोटीन शरीर के अन्य हिस्सों में भी पाया जाता है और ठंड लगने एवं अन्य बायोलॉजिकल एक्शन को शुरू करने के लिए ये प्रोटीन जिम्मेदार होता है. अब वैज्ञानिकों को पता चल चुका है कि ये दांतों के भीतर भी मौजूद है तो इसका मतलब ये है कि अब कैविटी से परेशान 2.4 अरब लोगों को राहत मिल सकती है.

आखिर क्यों लौंग के तेल का किया जाता है दांत दर्द में प्रयोग? मिला जवाब

इन सबसे बीच इस शोध में ये भी पता चला है कि क्यों लौंग के तेल का उपयोग सदियों से दांत के दर्द के इलाज के रूप में किया जाता रहा है. दरअसल, ये जेल की तरह काम करता है और दांतों पर फैल जाता है. इस तरह ये TRPC5 को होने से रोक देता है. इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि लोग सेंसटिविटी को कम करने के लिए पारंपरिक रूप से तेल का उपयोग करते रहे हैं. बुढ़ापे और अन्य कारणों के चलते एक समय के बाद दांत ठंड के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं. इस दौरान लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

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