जन्माष्टमी पर गो स्नान और पूजन से बरसेगी श्रीकृष्ण की कृपा

श्रीकृष्णजी को गोकुल में सिर्फ दूध-माखन ही नहीं गायों का भी भरपूर सानिध्य मिला. बाल सखाओं के साथ रोजाना जंगल जाकर अपनी गायों को चराते थे. गायों के प्रति उनके अंदर इस बदर प्रेम था कि उन्होंने ब्रज में इंद्र की पूजा बंद करवाकर गायों की उपासना शुरू करा दी थी, उनके इस प्रेम के चलते उन्हें गोपाल नाम भी पड़ा. मान्यता है कि खुद जन्माष्टमी के दिन भक्त गो सेवा करते हैं तो उन पर कृष्णजी की विशेष कृपा बरसती है. भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद पाने के लिए गाय को रोजाना चार-पानी आदि देने का विधान है,

लेकिन हर किसी के लिए आज के दौर में संभव नहीं होगा. इसके बावजूद जन्माष्टमी के दिन गाय को चारा जरूर खिलाएं. संभव हो तो घर में बनी पहली रोटी रोज के लिए गाय के लिए बनाएं और समय निकालकर उसे खिलाएं. इससे न सिर्फ गोमाता का आशीर्वाद मिलेगा, बल्कि भगवान कृष्ण समेत सभी देवी-देवताओं का आशीष मिलता है. गाय को सर्वाघिक गुड़ प्रिय है, संभव हो तो गाय को गुड़-चना खिलाएं. जन्माष्टमी के दिन चना गुड़ृ के साथ सर्वोत्तम आहार माना गया है, इसलिए अपनी क्षमता अनुसार जन्माष्टमी पर गाय को गुड़-चना खिलाएं। इसके अलावा जन्माष्टमी के दिन गाय को स्नान जरूर कराना चाहिए. ऐसा करने से मिलने वाला पुन्य भगवान कृष्ण के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं को स्नान कराने के बराबर फल देने वाला माना जाता है. मान्यता है कि जहां गाय प्रसन्न होती हैं, वहां नकारात्मक ऊर्जा कभी नहीं पनप पाती है.

हर वर्ष भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन श्रीकृष्ण की बाल स्वरुप पूजा होती है. हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ही श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इस दिन लोग श्रीकृष्ण का आशीर्वाद पाने के लिए उपवास रखने के साथ भजन-कीर्तन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं.

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