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औरतें इसलिए मर्दों से हट कर सोच पाती हैं.

“मेन्स आर फ्रॉम मार्स एंड वुमन आर फ्रॉम वीनस”

अग्रेज़ी की यह कहावत मर्द और औरत के बारे में हम सब ने सुनी ही हैं, जिसका मतलब यह हैं कि स्त्री और पुरुष दोनों अलग-अलग ग्रह से आये हैं.

ये बात आप को मज़ाकिया लग सकती हैं लेकिन कुछ वैज्ञानिकों ने इस बात पर मुहर लगा कर यह कहा हैं कि मर्द और औरत सच में दो अलग-अलग ग्रह के हो सकते हैं.

प्रकृति ने स्त्री और पुरुष की रचना इसलिए की हैं कि सृष्टि निरंतर चलती रहे.

स्त्री और पुरुष भले ही दोनों एक-दुसरे से बिलकुल भिन्न हो पर दोनों एक-दुसरे के पूरक हैं. इस क्रम में यदि कोई भी एक हट जाता हैं तो सृष्टि का आगे बढ़ना रुक जायेगा. लेकिन सामाजिक मान्यताओं के चलते ही आज यह स्थिति आ गयी हैं कि समाज में स्त्री और पुरुष एक दुसरे के प्रतिद्वंदी के रूप में ज्यादा प्रतीत  होते हैं. अक्सर पुरुष स्त्रियों का विरोध करते हैं और स्त्रियाँ पुरुषों का विरोध करती नज़र आती हैं, जिससे दोनों एक-दुसरे के पूरक कम और विरोधी ज्यादा नज़र आते हैं.

हमारा समाज शुरू से ही पुरुष प्रधान रहा हैं, जिसमे महिलाओं को पुरुषों की तुलना में हमेशा कम ही समझा गया हैं. इस परंपरा के चलते ही स्त्री के अधिकार को लेकर बहस भी होती रहती हैं. पुराने किसी काल ने बनाई गयी यह परंपरा उस वक़्त के लिए उचित मानी जा सकती हैं क्योकि उस वक़्त इंसान जिस तरह से जीवन जीता था, उसमे उसी का वर्चस्व होता जिसके पास शारीरिक शक्ति ज्यादा होती थी. हर इंसान जानवरों की तरह अपना एक झुण्ड बना कर रहा था जिसमे सबसे शक्तिशाली मर्द उस समूह का मुखिया होता था.

लेकिन वक़्त के साथ-साथ इंसान सभ्य होने लगा पर उस वक़्त की परम्पराएं नहीं छोड़ पाया. जहाँ पुरुष को उसकी जिस्मानी ताकत के लिए जाना जाता हैं वही स्त्रियों को उनके दिमागी कुशलता के लिए जाना जाता हैं.

अमेरिकी शोध के मुताबिक मर्द और औरतों के दिमागी बनावट में मुलभुत अंतर पाए गए हैं. जहाँ इस शोध में पुरुषों के दिमाग की बनावट आगे से पीछे की ओर हैं वहीँ महिलाओं के दिमाग बाएँ से दायें और दायें से बायें रूप में पाए गयी. इस रिसर्च में यह भी पता चला कि मर्दों में तांत्रिक तंत्र आधिक हैं तो महिलाओं में ग्रे मैटर ज्यादा पाया गया हैं.

इस शोध के बाद ही वैज्ञानिकों ने महिला और पुरुष के मूल स्वाभाव में पाए जाने वाले अंतर को भी सही बताया हैं.

इस शोध को सामान्य जिंदगी से जोड़ कर देखे तो पता चलता हैं कि पुरुषों का ज्यादा व्यवहारिक होना उनके दिमाग की बनावट का नतीजा हैं. जबकि इसके उल्टे औरतों के दिमाग में यही कमी उन्हें ज्यादा भावुक और बहुत संवेदनशील बना देती हैं. महिलाओं का मस्तिष्क उन्हें दिमाग के बजाये दिल से अधिक सोचने के लिए उन्हें प्रेरित करता हैं.

हम सब ने देखा ही होगा कि सर्जरी करने वाले ज्यादातर डाक्टर मर्द ही होते हैं और बात जब ड्राइविंग की आती हैं तो इसमें भी पुरुषों के दिमाग की बनावट ही उन्हें बेहतरीन ड्राइवर बनाती हैं. नक़्शे पढ़ने और समझने में भी पुरुष महिलाओं  से आगे होते हैं.

इन सब बातों के अलावा जब बात याददाश्त या विश्लेषण करने की आती हैं तो महिलों की दिमाग की बनावट उन्हें इस मामले में पुरुषों से बेहतर बनाती हैं. इस बनावट के चलते ही महिलाएं किसी का दिमाग पढ़ने, एकाग्रता और भावनाओं जैसे विषय में मर्दों से आगे हैं.

अब अगर आप की पार्टनर को आपकी बर्थडे या एनिवर्सरी डेट याद रखने की आदत हैं तो, आप यह समझ जाईये की इसमें उनका नहीं उनकी दिमागी बनावट का दोष हैं.

और अगर आपके बॉयफ्रेंड या पार्टनर के भूलने की आदत से आप परेशान हैं तो इसमें उनकी नहीं उनके दिमाग की बनावट ज़िम्मेदार हैं.

साथ ही यह मान लीजिये कि स्त्री और पुरुष अकेले-अकेले नहीं बल्कि एक साथ ही पुरे हैं.

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