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एक लेखिका का शानदार लेख, हम भारतीयों को ये समझाने के लिए कि, मुस्लिम कट्टर नहीं होते..

Muslim arch Rana Job Great article: वर्ष 2010 में मैंने एक cover story की थी, जिसमें महाराष्ट्र के अंदरूनी इलाकों में बसे मासूम दलितों और आदिवासियों पर नक्सली होने का झूठा आरोप लगाकर उन पर किए जाने वाले अत्याचार का ज़िक्र था। मेरी उस story में एक दलित कवि का भी ज़िक्र था, जिसका मज़ाक किसी और ने नहीं, police वालों ने ही इस बात को लेकर उड़ाया था कि वह jeans इसलिए पहनता है, क्योंकि वह सवर्ण कवियों जैसा दिखना चाहता है। यह दुःखी करने वाला था, और अजीब था।

फिल्म में बिल्कुल साफ-साफ तरीके से दलितों की बात किया जाना

पिछले साल जुलाई में जब तमिल superstar रजनीकांत की film ‘कबाली’ ज़ोरशोर से released हुई थी, आलोचकों और मेरे जैसे बहुत-से लोगों के दिलों को film के जिस पहलू ने छुआ था,

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वह था film में बिल्कुल साफ-साफ तरीके से दलितों की बात किया जाना। यह भारतीय cinema जगत के एक लिहाज़ से सबसे बड़े superstar की film थी। वह इतने बड़े superstar हैं, जिनकी film की released के मौके पर दक्षिण भारतीय राज्य छुट्टी घोषित कर दिया करते हैं।

दलित व्यक्ति का किरदार निभाया

‘कबाली’ के शुरुआती में रजनीकांत का किरदार ‘My Father Baliya’ नामक पुस्तक पढ़ता दिखाई देता है,

आमतौर पर द्रविड़ प्रतीकों से भरी रहने वाले तमिलभाषी सिनेमा के लिए यह film बेहद क्रांतिकारी परिवर्तन रही। film की समीक्षा में website ‘The Wire’ ने लिखा, “रजनीकांत ने ‘कबाली’ में एक ऐसे जागरूक दलित व्यक्ति का किरदार निभाया, जो (बाबासाहेब भीमराव) अम्बेडकर के सूट-बूट पहनने जैसी बारीकियों के अर्थ समझता था.

उन्होंने हर बार एक मुस्लिम किरदार निभाया

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हिन्दुस्तान के सबसे बड़े फिल्मी सितारों में शुमार किए जाने वाले शाहरुख खान ने पिछले 4 महीनों में लगातार 3 फिल्मों में काम किया है, और उन्होंने हर बार एक मुस्लिम किरदार निभाया। ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में अहम कैमियो करते हुए वह ताहिर खान के रूप में दिखे, जो ऐश्वर्या राय बच्चन के सबा के साथ जुड़ता है। ‘डियर ज़िन्दगी’ में वह जहांगीर खान बने हैं, और अब वह बहुप्रतीक्षित film ‘Rais’ में दिखाई देंगे।

शाहरुख खान की मजबूत सोच ही वह वजह थी

वैसे तो शाहरुख खान ने असल ज़िन्दगी में भी अपनी धार्मिक पहचान को कभी छिपने नहीं दिया। 9/11 के बाद लिखे एक column में islam को लेकर गलतफहमियां दूर करने की कोशिश करने से लेकर अलग-अलग अवसरों पर अपनी आस्था के बारे में खुलकर बात करने तक कई बार ऐसे मौके आए,

धर्म के आधार पर की जाने वाली नाइंसाफी के खिलाफ शाहरुख खान की मजबूत सोच ही वह वजह थी, जिसके चलते करण जौहर ने उन्हें ‘My Name Is Khan’ में रिज़वान खान बना डाला, जो अपने मज़हब के माथे पर लगा दिए गए ‘आतंकवादी’ के ठप्पे को मिटा देना चाहता है।

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