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इरफान की पहली बरसी:इरफान खान की ‘द लंचबॉक्स’ को-स्टार निमरत कौर बोलीं- ‘वे बहुत ही असाधारण व्यक्ति थे, उनका होना ही फ्रेम के लिए पर्याप्त था’

बॉलीवुड एक्टर इरफान खान की पहली डेथ एनिवर्सरी है। दो साल तक कैंसर की जंग लड़ने के बाद इरफान का निधन 29 अप्रैल 2020 को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में हुआ। एक्टर के निधन के बाद फिल्म जगत में एक गहरा सन्नाटा पसर गया था। अभिनेत्री निमरत कौर, जिन्होंने फिल्म ‘द लंचबॉक्स’ में इरफान खान के साथ स्क्रीन साझा की थी की मानें तो इरफान की मात्र उपस्थिति ही एक फ्रेम के लिए पर्याप्त थी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान, निमरत ने इरफान से जुडी कुछ खास यादें साझा की हैं।

इरफान की उपस्थिति ही एक फ्रेम के लिए पर्याप्त थी:

निमरत बताती हैं, “बहुत ही अजीब महसूस हो रहा है इरफान के बारे में भूतकाल में बात करना, अब भी यकीन करना मुश्किल होता है कि वे अब हमारे बीच में नहीं रहे। इरफान के बिना अब इंडियन सिनेमा पहले जैसा बिलकुल नहीं रहा। दुर्भाग्यवश मैंने उनके साथ फिल्म की लेकिन काम नहीं किया। हमारी फिल्म ‘द लंचबॉक्स’ के सिर्फ एक दिन के शूटिंग के दौरान हम दोनों एक लोकेशन पर मौजूद थे। वहां हमने एक सीन शूट किया था लेकिन हमारे बीच कोई डायलॉग नहीं था। हालांकि इरफान की मात्र उपस्थिति ही एक फ्रेम के लिए पर्याप्त थी। जाहिर है, उस वक्त लगता था कि मुझे इरफान के साथ काम करने के और भी मौके मिलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज भी जब इस बारे में सोचती हूं तो अजीब लगता है। मैं उनके साथ काम करना चाहती थी, लेकिन शायद किस्मत में कुछ और ही लिखा था।”

वे बहुत ही असाधारण व्यक्ति थे:

अभिनेत्री आगे बताती हैं, “भले ही फिल्म की शूटिंग के दौरान इरफान के साथ वक्त बिताने का मौका ना मिला हो लेकिन कई फिल्म फेस्टिवल्स में उनके साथ थी। यकीन मानिये, वे बहुत ही असाधारण व्यक्ति थे। उनकी भाषा पर जो कमांड थी वो वाकई में बहुत अच्छी थी, बतौर अभिनेता उन्हें किसी भी वोकेबुलरी की जरूरत नहीं थी। जिस तरह से वे लोगों से बातचीत करते, वो देखकर लगता कि मानो वे अपने आपको बिलकुल गंभीरता से नहीं लेते थे। अपने आसपास के लोगों से बातचीत के दौरान, उनका एक अलग सा कल्चर नजर आता था जिसे देखकर कोई भी इम्प्रेस हो जाए। मैंने उनके कुछ कलीग्स से भी बात की और वे भी बताते हैं कि इरफान के साथ काम करने में एक अपना ही मजा है, उनके जैसा सहज व्यक्ति कोई नहीं। कहीं-न-कहीं उनकी पर्सनालिटी उनके किरदारों में भी झलकती है।”

इरफान हर माहौल को हल्का-फुल्का बना देते:

निमरत आगे बताती हैं कि इरफान का सेंस ऑफ ह्यूमर बड़ा ही कमाल का था। वे कहती हैं, “जिस तरह से इरफान हर माहौल को हल्का-फुल्का बना देते थे वो सच में आसपास के लोगों के लिए बहुत प्रभावशाली होता था। उन्होंने सिनेमा में इतना अच्छा काम किया लेकिन अपने स्टारडम को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। ये उनकी सबसे अच्छी बात थी।”

निधन की खबर सुनी तो कुछ वक्त के लिए गहरा सन्नाटा छा गया:

बातचीत के दौरान, निमरत ने बताया कि उन्हें इरफान की बिमारी के बारे में पहले से जानकारी थी और उस वक्त उन्हें यकीन था कि वे इस बिमारी की लड़ाई को जरूर जीतेंगे। वे कहती है, “मुझे एक कॉमन फ्रेंड के जरिये इरफान की बीमारी के बारे में पता चला था और उस वक्त मेरे ख्याल में एक ही बात आई थी- ये इरफान है, हर जंग को जीत लेगा। जब मैंने सुना कि उन्होंने ‘अंग्रेजी मीडियम’ की शूटिंग शुरू कर दी है, तो यकीन मानिये मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन जब पिछले साल उनके निधन की खबर सुनी तो कुछ वक्त के लिए गहरा सन्नाटा छा गया। कुछ देर के लिए, यकीन नहीं हुआ कि उन्होंने हमें अलविदा कह दिया।” बता दें, निमरत कौर की आखिरी मुलाकात इरफान खान से एक अवार्ड फंक्शन में हुई थी।

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