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इन जानलेवा बीमारियों का इलाज करेंगे मच्‍छर! खास एक्‍सपेरीमेंट को अंजाम दे रहे वैज्ञानिक

मच्‍छरों से बचने के लिए आप क्‍या-क्‍या जुगत नहीं लगाते होंगे. लिक्‍विड वेपरोइजर, फास्‍ट कार्ड से लेकर रिपेलेंट क्रीम तक का इस्‍तेमाल करते हैं. इसके अलावा भी खिड़की दरवाजों पर नेट लगाने से लेकर नालियों व पानी जमा होने के अन्‍य स्‍थानों की सफाई आदि करते हैं. मच्‍छर से पनपने वाले मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी बीमारियां इंसानों के लिए जानलेवा होती हैं. लेकिन अब मच्‍छरों की वजह से ही इन बीमारियों को मात देने की तैयारी हो रही है.

साइंस और तकनीक हर रोज विकसित हो रहा है ताकि इंसानों के जीवन को पहले से अधिक आरामदायक और सुलभ बनाया जा सके. इसी दिशा में बढ़ते हुए वैज्ञानिक अपने-अपने क्षेत्र में एक्‍सपेरीमेंट करते रहते हैं. अब फ्लोरिडा मॉस्‍क्विटो कंट्रोल डिस्ट्रिक्‍ट और ब्रिटिश फर्म बायोटेक ऑक्जिटेक ने एक ऐतिहासिक ऐलान किया है. ये दोनों ईकाईयां साथ मिलकर एक ऐसे मच्‍छर का लार्वा तैयार कर रहे हैं, जो इंसानों को नहीं काट सकेंगे.

विकासशील देशों में हो जाएगा कई जानलेवा बीमारियों का ख़ात्‍मा

इसके लिए जे‍नेटिक मोडिफिकेशन का सहारा लिया जा रहा है. अगर यह खोज सफल हो जाती है तो ज़ीका, येला फीवर, डेंगू जैसी खतरनाक बीमारियों पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है. खासकर विकासशील देशों में इन बीमारियों को लेकर बड़ी समस्‍या से जूझना पड़ता है.

ऐसा क्‍या कर रहे रिसर्चर्स?

रिसर्चर्स के मुताबिक, हर हफ्ते मच्‍छरों की एक खास प्रजाति (Aedes aegypti mosquito) के तकरीबन 12,000 प्रजातियों को तैयार किया जाएगा. इसकी शुरुआत पिछले हफ्ते से हो चुकी और अगले 12 हफ्तों के लिए यह जारी रहेगी. इन्‍हें 6 अलग-अलग लोकेशन से तैयार किया जाएगा. इनमें दो जगह कुडजो की, एक रैमरोड की और तीन वाका की के होंगे. ये जगहें फ्लोरिड के टापू हैं.

दरअसल, वैज्ञानिक चाहते हैं कि आने वाले समय में करोड़ों की संख्‍या में ऐसे मच्‍छरों को विकसित किया जाए ताकि मौजूदा समय में मच्‍छर से होने वाली बीमारियों को खत्‍म किया जा सके. उनका कहना है कि ये मच्‍छर काटने वाली लोकल फीमेल मच्‍छरों के साथ मेट करेंगे.

इससे समय के साथ फीमेल ऑफस्प्रिंग के जीने के लिए स्थिति अनुकूल नहीं रहेगी और इस प्रकार आने वाले भविष्‍य में इन प्रजाति के मच्‍छर की संख्‍या कम होती जाएगी.

मोडिफाईड मच्‍छरों में होंगे दो खास तरह के जीन्‍स

जेनेटिक मोडिफिकेशन के जरिए तैयार किए गए मच्‍छरों में दो तरह के जीन्‍स होंगे. इसमें पहला जीन फ्लोरेसेंट मार्कर होंगे जो खास तरह की लाल रौशनी में चमकेंगे. इससे रिसचर्स आसानी से सामान्‍य मच्‍छरों और जेनेटिकली मोडिफाइड मच्‍छरों में अंतर समझ सकेंगे.

दूसरा जीन सेल्‍फ लिमिटंग होगा. इसका काम फीमेल मच्‍छरों में ऑफस्प्रिंग की क्षमता को कम करना होगा . अमेरिका के ‘सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन’ (CDC) ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है.

मोडिफाईड मच्‍छरों से नहीं होगा कोई नुकसान

CDC ने यह भी स्‍पष्‍ट किया है कि जेनेटिक मोडिफिकेशन की मदद से तैयार किए गए मच्‍छरों से इंसानों, जानवरों या पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा. रिपोर्ट में जोर देकर यह भी कहा गया है कि ये मच्‍छर किसी आउटब्रेक को रोकने के मकसद से नहीं तैयार किए गए हैं.

हालांकि, कुछ महीनों के दौरान इन मच्छरों की मदद से कुछ खास तरह के मच्‍छर प्रजाति की संख्‍या को कम किया जा सकता है. अभी भी मच्‍छरों के प्रजनन और उनके आउटब्रेक से बचने का सबसे कारगर तरीका है कि उन्‍हें ऐसी स्थिति से पहले ही रोक लिया जाए.

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