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आइए आप के साथ सुलझाते हैं बेहतर जिन्दगी की सुन्दर पहेली

दिल्ली। सफलता, मंजिल तो सभी के लिए लाजवाब होती है लेकिन सभी लोग उसका स्वाद चखें, ऐसा नहीं होता है। सफलता-असफलता के बीच उहापोह की स्थिति होती है। असफलता के डर से अधिकांश लोग सफलता के करीब पहुंच कर दूर हो जाते हैं। असफलताओं का डर सबसे बड़ा रोड़ा होता है। सफलता के बीच में डर ही बाधक है। डर से ही लोग कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने की साहस नहीं करते हैं और यही जीवन में आगे बढ़ने से रोकता है। असफलता की कल्पना के डर से लोग औसत दर्जे की सफलता में संतोष कर लेते हैं। सच तो यह है कि असफलता के पायदान पर पांव रख कर ही सफलता मिलती है। जिन्दगी एक पहेली है जिसे सुलझाना ही होता है।

विफलता से परिचय होना जीवन में आवश्यक है। सफलता पाने के लिए विफलता जरूरी है। विफलता को रोका नहीं जा सकता है, क्योंकि उस पर नियंत्रण नहीं होता है। सफलता का लक्ष्य निर्धारित करते समय असफलता के लिए तैयार रहना होगा। सफलता और असफलता दोनों साथ-साथ हैं। सफलता पाने के लिए कमजोरियों के खिलाफ तेज काम करना होता है। कमजोरी को ही ताकत में बदलना होगा। बाधाओं से बचते हुए लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। कमजोरियों के निवारण से काम में कुशलता आती है। यह अलग बात है कि असफलता से निराशा तो बढ़ती ही है लेकिन जिसने असफलताओं के बीच अपने को मजबूत बना लिया वही सफल होता है।

आशावादी के लिए सफलता इंतजार करती है। असफल व्यक्ति को एहसास हो जाता है कि उसे कामयाब नहीं होने में कहां पर कमजोर कड़ी रह गयी। इसी कड़ी को और मजबूत बनाना होगा। असफलता से अनुभव प्राप्त होता है। जोखिम लेने से पहले सभी पक्षों पर रणनीति में सुधार कर लिया जाता है। काम में निपुणता आती है। व्यक्ति को विफलता प्रत्येक परिस्थिति में मजबूत बना देता है। विफलता व्यक्ति को एहसास दिला देती है कि कम से कम एक ऐसा मार्ग है जिस पर नहीं चलना है। दूसरे ढेर सारे विकल्प खुल जाता है। रचनात्मकता और उत्साह से चुनौतियों को पार कर अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। असफलता से नई रणनीति सोच कर सही रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। इसमें बुद्धि और भावनाओं का एक संतुलन होना चाहिए। सुधार की जरूरत सफल होने के लिए भी जरूरी है।

लक्ष्य तक पहुंचना ही एक मात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए बल्कि प्रयासों से सीखने के लिए तैयार भी रहना है। जीवन क्षणों का एक संकलन है जिसमें हर पल कुछ ना कुछ नया होता है। इन्हीं खुशियों में जिन्दगी चलती है। किसी भी पल कुछ भी बेहतर हो सकता है। हमारे सामने पूरी दुनिया खुली पड़ी है। सफलता और विफलता जीवन के एक सिक्के के दो पहलू हैं, जिसमें एक होना तो निश्चित है। जब जीत-हार की सम्भावना बराबर है तो निराश होने से बेहतर है कि सकारात्मक हो कर आगे की सोचा जाये। जीवन का अंत हमेशा जीत नहीं होता है बल्कि आगे एक नई चुनौती फिर सामने होती है। बेहतर रास्ते पर चलना शुरू हो जाता है।

अफ्रीकन कहावत है कि शांत समुद्र में खेवते रहने से कभी नाविक कुशल नहीं बन सकता है। इसलिए चुनौतियों के बीच रहिए और सामना कीजिए। चुनौतियों का परिणाम ही सफलता है। आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास के बीच एक बारीक़ रेखा होती है। यही स्थिति सफलता और असफलता के बीच है। सफलता एक आनन्द है जो विफलता के बाद ही मिलता है। ध्यान रहे तपती गर्मियों के बाद ही सावन की फुहार आनन्द देती है। सैमुअल बेकेट के शब्दों में कहा जाये तो कभी कोशिश की, कभी नाकामयाब हुए, कोई बात नहीं। फिर कोशिश करें, फिर असफल भले हों पर यह असफलता पहले से अलग और बेहतर ज़रूर होनी चाहिए।

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